दिल्ली नगर निगम के लिए 23 अप्रैल को मतदान होना है। वोटिंग से पहले जनता का मूड भांपने को समाचार चैनल एबीपी न्यूज ने सी-वोटर के साथ मिलकर सर्वे किया है। इस सर्वे में एमसीडी पर बीजेपी की बादशाहत बरकरार रहेगी, ऐसा अनुमान लगाया गया है। सर्वे के अनुसार, दिल्ली नगर निगम 2017 के चुनाव में कुल 272 सीटों में बीजेपी को 179 सीटें मिलेंगी, जबकि आम आदमी पार्टी 45 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रहेगी। कांग्रेस 26 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर खिसकती दिखाई गई है। इसके अलावा अन्य के खाते में 22 सीटें जाने का अनुमान लगाया गया है। सर्वे के अनुसार, नॉर्थ दिल्ली की 104 सीटों में बीजेपी का वोट शेयर 44 फीसदी रहेगा। इसके अलावा AAP को यहां 25 फीसदी वोट, कांग्रेस को 19 फीसदी तथा अन्य को 12 फीसदी वोट मिलेंगे। साउथ दिल्ली में बीजेपी को 39 फीसदी, AAP को 32 फीसदी, कांग्रेस को 20 प्रतिशत व अन्य को 9 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है।
एबीपी न्यूज-सी वोटर के ओपिनियन पोल के अनुसार दिल्ली नगर निगम के नतीजे कुछ इस तरह रहेंगे:
बीजेपी – 179
आप – 45
कांग्रेस – 26
अन्य – २२
भाजपा ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि आप के अंदरुनी सर्वे में भाजपा को 202 सीटें मिल रही हैं, इसीलिए उसने अपना सर्वे जारी नहीं किया। एमसीडी चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं और 26 तारीख को इसके नतीजे घोषित किए जाएंगे। भाजपा 10 साल से एमसीडी की सत्ता में काबिज है। इस बार दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
आप एमसीडी में भाजपा के 10 साल के कार्यकाल को मुद्दा बनाते हुए मैदान में हैं। वहीं भाजपा केजरीवाल सरकार के दो साल के कामकाज को निशाना बना रही है। साथ ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को भी भुनाने की कोशिश में लगी है। कांग्रेस सरकार चलाने के अपने अनुभव को गिनाते हुए चुनौती दे रही है।
एबीपी न्यूज-सी वोटर के ओपिनियन पोल के अनुसार दिल्ली नगर निगम के नतीजे कुछ इस तरह रहेंगे:
बीजेपी – 179
आप – 45
कांग्रेस – 26
अन्य – २२
भाजपा ने कुछ दिन पहले दावा किया था कि आप के अंदरुनी सर्वे में भाजपा को 202 सीटें मिल रही हैं, इसीलिए उसने अपना सर्वे जारी नहीं किया। एमसीडी चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं और 26 तारीख को इसके नतीजे घोषित किए जाएंगे। भाजपा 10 साल से एमसीडी की सत्ता में काबिज है। इस बार दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।
आप एमसीडी में भाजपा के 10 साल के कार्यकाल को मुद्दा बनाते हुए मैदान में हैं। वहीं भाजपा केजरीवाल सरकार के दो साल के कामकाज को निशाना बना रही है। साथ ही वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को भी भुनाने की कोशिश में लगी है। कांग्रेस सरकार चलाने के अपने अनुभव को गिनाते हुए चुनौती दे रही है।

No comments:
Post a Comment